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त्योहार

पुत्रदा एकादशी 2026: तारीख, पारण समय और पूजा विधि

श्रावण पुत्रदा एकादशी 2026 रविवार, 23 अगस्त को है। जानें एकादशी तिथि, पारण का समय, सरल विष्णु पूजा विधि, व्रत के नियम और धार्मिक महत्व।

Parashar Hora Editorial3 min read27 जुलाई 2026
श्रावण पुत्रदा एकादशी 2026: तारीख, पारण समय, पूजा विधि और महत्व

श्रावण पुत्रदा एकादशी 2026

श्रावण पुत्रदा एकादशी रविवार, 23 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी।

यह श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है और भगवान विष्णु को समर्पित है। पारंपरिक रूप से इस दिन संतान, बच्चों के कल्याण और परिवार में सुख-शांति के लिए प्रार्थना की जाती है।

व्रत को गर्भधारण की निश्चित गारंटी या चिकित्सा के विकल्प के रूप में प्रस्तुत नहीं करना चाहिए।

पुत्रदा एकादशी 2026 एक नजर में

  • तारीख: 23 अगस्त 2026
  • दिन: रविवार
  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 23 अगस्त को लगभग सुबह 2:00 बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त: 24 अगस्त को लगभग सुबह 4:19 बजे
  • पारण: 24 अगस्त
  • नई दिल्ली में पारण समय: लगभग दोपहर 1:41 से शाम 4:16 बजे तक
  • आराध्य देव: भगवान विष्णु

नई दिल्ली में एकादशी तिथि 24 अगस्त को लगभग सुबह 4:19 बजे समाप्त होगी। स्थान-आधारित गणना के अनुसार पारण लगभग दोपहर 1:41 से शाम 4:16 बजे के बीच किया जा सकता है।

समय शहर और परंपरा के अनुसार बदल सकता है। निश्चित समय प्रकाशित करने से पहले अपने शहर का दैनिक पंचांग देखें।

पुत्रदा एकादशी का महत्व

पुत्रदा शब्द का पारंपरिक अर्थ संतान प्रदान करने वाली एकादशी से जुड़ा है।

इस दिन भक्त भगवान विष्णु से बच्चों के स्वास्थ्य, परिवार के कल्याण और माता-पिता की जिम्मेदारियां बुद्धिमानी से निभाने की शक्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।

इसका गहरा अर्थ केवल संतान प्राप्ति की इच्छा तक सीमित नहीं है। यह इस बात पर विचार करने का अवसर भी है कि हम अगली पीढ़ी को कौन-से संस्कार, आदतें और मूल्य दे रहे हैं।

सरल पूजा विधि

स्नान के बाद पूजा स्थान को साफ करें और भगवान विष्णु का चित्र या प्रतिमा सम्मानपूर्वक स्थापित करें।

पूजा में अर्पित करें:

  • स्वच्छ जल,
  • तुलसी दल,
  • फूल,
  • मौसमी फल,
  • धूप,
  • सुरक्षित स्थान पर दीपक।

इस मंत्र का जप किया जा सकता है:

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

समय और पारिवारिक परंपरा के अनुसार विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी किया जा सकता है।

भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी, फल, दीपक तथा विष्णु सहस्रनाम पाठ का प्रचलन है।

व्रत और पारण

भक्त स्वास्थ्य और पारिवारिक परंपरा के अनुसार:

  • पूर्ण उपवास,
  • फलाहार,
  • जल और फल,
  • सरल अनाज-रहित भोजन

में से कोई पद्धति अपना सकते हैं।

एकादशी व्रत का समापन अगले दिन द्वादशी में पारण करके किया जाता है। हरिवासर समाप्त होने से पहले पारण नहीं किया जाता।

बच्चों, किशोरों, गर्भवती महिलाओं, दवा लेने वाले व्यक्तियों और किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे लोगों को उचित पारिवारिक या चिकित्सकीय मार्गदर्शन के बिना कठोर व्रत नहीं रखना चाहिए।

व्रत न रख पाने वाला व्यक्ति भी पूजा, मंत्र जप, दान, सरल भोजन और अच्छे आचरण से एकादशी का पालन कर सकता है।

कुछ वैष्णव और ISKCON परंपराओं में व्रत 24 अगस्त को तथा पारण 25 अगस्त को हो सकता है। अपने परिवार, मंदिर या संप्रदाय के पंचांग का पालन करें।

सावन की अन्य महत्वपूर्ण तारीखों के लिए सावन 2026 की संपूर्ण जानकारी पढ़ें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुत्रदा एकादशी 2026 कब है?

सामान्य स्मार्त परंपरा के अनुसार पुत्रदा एकादशी रविवार, 23 अगस्त 2026 को है।

व्रत का पारण कब किया जाएगा?

नई दिल्ली में पारण 24 अगस्त को लगभग दोपहर 1:41 से शाम 4:16 बजे तक किया जा सकता है। स्थानीय समय अलग हो सकता है।

पुत्रदा एकादशी पर किसकी पूजा होती है?

इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।

क्या इस व्रत से संतान की निश्चित प्राप्ति होती है?

इसे गर्भधारण की गारंटी के रूप में प्रस्तुत नहीं करना चाहिए। यह धार्मिक और आध्यात्मिक व्रत है तथा चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं है।

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