Astrological constellation background
Back to Insights
त्योहार

बलराम जयंती / हल छठ 2026: तारीख, पूजा विधि और व्रत नियम

हल षष्ठी 2026 बुधवार, 2 सितंबर को है। जानें षष्ठी तिथि का समय, सरल पूजा विधि, व्रत में क्या खाएं, किन चीजों से बचें और हलछठ का धार्मिक महत्व।

Parashar Hora Editorial6 min read31 जुलाई 2026
बलराम जयंती / हल छठ 2026: तारीख, पूजा विधि, व्रत के नियम और महत्व

हल षष्ठी 2026

हल षष्ठी का व्रत बुधवार, 2 सितंबर 2026 को रखा जाएगा।

उत्तर भारतीय पूर्णिमांत पंचांग में यह व्रत भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी को मनाया जाता है। अमांत पंचांग में यही दिन श्रावण कृष्ण षष्ठी कहलाता है। दोनों प्रणालियों में त्योहार की तारीख समान रहती है; केवल चंद्र मास का नाम बदलता है।

हल षष्ठी को अलग-अलग क्षेत्रों में इन नामों से भी जाना जाता है:

  • हलछठ,
  • हरछठ,
  • ललही छठ,
  • कमर छठ,
  • खमर छठ,
  • चंदन छठ।

यह व्रत मुख्य रूप से माताएं अपनी संतान के स्वास्थ्य, सुरक्षा और सुखी जीवन की प्रार्थना के लिए रखती हैं।

हल षष्ठी 2026 एक नजर में

  • तारीख: 2 सितंबर 2026
  • दिन: बुधवार
  • षष्ठी तिथि प्रारंभ: लगभग सुबह 6:12 बजे
  • षष्ठी तिथि समाप्त: 3 सितंबर को लगभग सुबह 4:25 बजे
  • आराध्य: भगवान बलराम और षष्ठी माता
  • अन्य नाम: हलछठ, हरछठ और ललही छठ

सुबह 6:03 से 9:15 बजे तक का समय निश्चित राष्ट्रीय पूजा मुहूर्त के रूप में प्रकाशित नहीं करना चाहिए। षष्ठी तिथि ही लगभग 6:12 बजे शुरू हो रही है। पूजा का सही समय अपने शहर के पंचांग और पारिवारिक परंपरा के अनुसार रखें।

हल षष्ठी क्यों मनाई जाती है?

हल का अर्थ खेती में उपयोग किया जाने वाला हल है।

भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम का प्रमुख आयुध हल माना जाता है। इसी कारण उन्हें हलधर और हलायुध भी कहा जाता है।

इस संबंध के कारण व्रत करने वाली महिलाएं परंपरागत रूप से उन खाद्य वस्तुओं का सेवन नहीं करतीं जो हल से जोते गए खेत में पैदा हुई हों।

यह पर्व मातृत्व और जिम्मेदार पालन-पोषण से भी जुड़ा है। संतान की लंबी आयु की प्रार्थना के साथ यह माता-पिता को बच्चों के स्वास्थ्य, संस्कार और सुरक्षा के प्रति अपने कर्तव्य याद दिलाता है।

हल षष्ठी व्रत के प्रमुख नियम

क्षेत्र और परिवार के अनुसार नियम अलग हो सकते हैं। सामान्य परंपराओं में शामिल हैं:

  • हल से जोते खेत में उगी वस्तुओं का सेवन न करना,
  • सामान्य अनाज और खेत की सब्जियों से बचना,
  • गाय का दूध, दही और उनसे बने पदार्थ न लेना,
  • पारिवारिक परंपरा में अनुमति होने पर भैंस के दूध या दही का प्रयोग,
  • पसही अथवा तिन्नी के चावल का सेवन,
  • महुआ, फल या स्वीकार्य व्रत आहार लेना,
  • हल षष्ठी व्रत कथा सुनना,
  • संतान के मंगल की प्रार्थना करना।

ये धार्मिक परंपराएं हैं, चिकित्सा नियम नहीं। व्रत स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाला नहीं होना चाहिए।

सरल हल षष्ठी पूजा विधि

सुबह स्नान करके पूजा का स्थान साफ करें।

अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार षष्ठी माता, भगवान बलराम अथवा शिव परिवार का चित्र या प्रतीक स्थापित करें।

कुछ क्षेत्रों में झरबेरी, पलाश और गूलर की टहनियों को एक साथ बांधकर हरछठ का प्रतीक बनाया जाता है।

पूजा में सामान्यतः अर्पित किया जा सकता है:

  • स्वच्छ जल,
  • चंदन,
  • कुमकुम,
  • फूल,
  • फल,
  • सुपारी,
  • दीपक,
  • पारंपरिक प्रसाद।

पूजा के बाद हल षष्ठी व्रत कथा पढ़ें या सुनें और संतान के स्वास्थ्य, सद्बुद्धि तथा सुरक्षा के लिए प्रार्थना करें।

अलग-अलग क्षेत्रों में षष्ठी माता, भगवान बलराम और शिव परिवार की पूजा की परंपराएं मिलती हैं। इसलिए परिवार में चली आ रही विधि को किसी सामान्य इंटरनेट सूची से अधिक महत्व दें।

हल षष्ठी के व्रत में क्या खाया जाता है?

पारंपरिक रूप से इनका उपयोग किया जा सकता है:

  • पसही या तिन्नी के चावल,
  • महुआ,
  • फल,
  • सूखे मेवे,
  • तालाब या प्राकृतिक जलस्रोत के आसपास उगने वाली स्वीकृत वस्तुएं,
  • परिवार की परंपरा के अनुसार भैंस का दूध या दही।

अनेक समुदायों में गाय का दूध और दही वर्जित माना जाता है।

यह भी ध्यान रखें कि पूजा में चढ़ाई जाने वाली सामग्री और व्रत में खाई जाने वाली सामग्री हमेशा एक समान नहीं होती। पूजा में अर्पित प्रत्येक वस्तु को व्रत का भोजन न मानें।

क्या हल षष्ठी और बलराम जयंती एक ही दिन हैं?

हल षष्ठी का भगवान बलराम से संबंध उनके हल के कारण है।

लेकिन कुछ पंचांग बलराम जयंती को 16 सितंबर 2026, भाद्रपद शुक्ल षष्ठी पर अलग से दिखाते हैं। इसलिए हर परंपरा में हल षष्ठी और बलराम जयंती को एक ही त्योहार मानना सही नहीं होगा।

व्रत रखते समय स्वास्थ्य का ध्यान

कठोर उपवास को भक्ति का प्रमाण न बनाएं।

गर्भवती महिलाएं, किशोर, दवा लेने वाले लोग, मधुमेह या अन्य स्वास्थ्य समस्या वाले व्यक्ति परिवार और योग्य चिकित्सक की सलाह के अनुसार व्रत में बदलाव करें।

व्रत न रख पाने वाला व्यक्ति भी पूजा, कथा, दान और बच्चों की जिम्मेदार देखभाल के माध्यम से पर्व का पालन कर सकता है।

त्योहारों की तारीखों और व्रतों की जानकारी के लिए हिंदू कैलेंडर देखें। स्थान-आधारित तिथि और पूजा समय के लिए अपने शहर का दैनिक पंचांग देखें। सावन के अन्य व्रत और त्योहारों के लिए सावन 2026 की संपूर्ण जानकारी पढ़ें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हल षष्ठी 2026 कब है?

हल षष्ठी बुधवार, 2 सितंबर 2026 को है।

षष्ठी तिथि कब से कब तक रहेगी?

षष्ठी तिथि लगभग 2 सितंबर को सुबह 6:12 बजे शुरू होकर 3 सितंबर को सुबह 4:25 बजे समाप्त होगी।

हल षष्ठी को और किन नामों से जाना जाता है?

इसे हलछठ, हरछठ, ललही छठ, कमर छठ, खमर छठ और चंदन छठ कहा जाता है।

क्या हल षष्ठी में गाय का दूध लिया जाता है?

अनेक क्षेत्रीय परंपराओं में गाय का दूध और दही नहीं लिया जाता। कुछ परिवार भैंस के दूध या दही का प्रयोग करते हैं।

क्या हल षष्ठी बड़ी छठ पूजा है?

नहीं। हल षष्ठी अलग व्रत है। कार्तिक मास में होने वाली सूर्य उपासना की चार दिवसीय छठ पूजा इससे अलग है।

पूजा का शुभ समय क्या है?

किसी एक राष्ट्रीय तीन घंटे के मुहूर्त की पुष्टि नहीं होती। षष्ठी तिथि लगभग सुबह 6:12 बजे शुरू होगी। अपने शहर के स्थान-आधारित पंचांग और पारिवारिक विधि के अनुसार पूजा करें।

More Insights